जाने दो

गम की राह पर पतथ्हर न बीखेरो ,
यह दील है दील , इसे जरा बहक जाने दो .

शीशे से कभी कोई आशिया नही बनता ,
मिर्च को भी जरा आखों से गुजर जाने दो ।

बगावत मैं भी बड़ा लुत्फ़ आने लगा है ,
इस शोर मैं भी गुल को खिल जाने दो .

हकीकत ऐसी है की ख्वाब भी शर्मा जाये ,
बड़ी आंधी मैं कार्वें को बढ़ जाने दो .

कोई फरिश्ता इधर ही देख रह है “नूर ” ,
मेरी धडकनों को हवा मैं उड़ जाने दो !!!

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