Bas Main Aisa Hi Hoon :-)

स्वयं बन्धनों में मैं बंध जाऊं ,

सौ बातें कह दूँ ,दो बातें सून लूँ ,

मस्ती के आलम के साथ निरंतर चल लूँ ,

बस मैं ऎसी ही हूँ …बस ऎसी ही मैं जो हूँ …..||


जी भरकर यहाँ वहां घूम और खेला करून

ले नखशिखांत जोश -ओ -खरोश मैं जो घूमा और बोला करून …

स्वच्छंद लुटाकर प्यार मैं आगे बढ़ा करून …

बस मैं ऎसी ही हूँ …बस ऎसी ही मैं जो हूँ …||


धूल उदाति यहाँ और वहां चलूँ ,

जग से उसका कुछ –‘ बस कुछ ’ लेकर चलूँ ,

जग को उसका सब कुछ मैं देकर चलूँ …

बस मैं ऎसी ही हूँ …बस ऎसी ही मैं जो हूँ …..||


मैं मरघट से जिंदगी बुला लाती हूँ ,

आँख मिचौली मैं अपनों से और सब से जो खेल जाती हूँ ,

सच कहती हूँ ,सुच मैं आज कहती हूँ ,

बस मैं ऎसी ही हूँ …बस ऎसी ही मैं जो हूँ…..||


मुझे पता है ,ख़बर है तुम ऎसी क्यों हो ,ऎसी ही हो …

सच कहता हूँ ,सच मैं भी “नूर ” यह आज कहता हूँ ,

इसीलिए तुम्हे अपना साथ और प्यार मैं जो देता हूँ ……

बस मैं ऐसा ही हूँ …बस ऐसा ही मैं भी जो हूँ …..

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