Kad Janjaal

यह कैसा गुरूर है ,
यह कैसा सुरूर है
सब कुछ तेरा है भोले
बस किंचित भाव यही जरूर है ||

अन्तर्मन असमंजस है
अन्धकार हर मन घनघोर है
आवाज दल विश्व है हाहाकार
बस तेरी हामी जरूर है ||

कब आऊंगा ऊपर पट पर
कब होगा आरंभ मीत विश्व
कब खोलूँगा कड़ जंजाल
चुपचाप मग्न हे महाकाल |||

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