Hajir

मैंने उसे तलाश किया , उसकी बातों मे, उसके लहजे में
उसकी तस्वीरों में , उसके रंगीन कपड़ों में,
उसके सामानो में, और उसके …हर तरफ हर जगह , कहा नही
वो मिला नहीं …कहीं नहीं लेकिन
जब शुरू किया लिखना , उसके बारें में
इंशाल्लाह वोह ‘नूर’, हर एक लफ्ज में अशर में..सियाही की हर एक बूँद में हाजिर था ॥

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