मेरी मुख्तसरनवीसी-SHORTHAND

एक इलाही मोड़ पर , दीदार जो हुआ
मुख़्तसर ही सही , रूप झमाझम तो हुआ ,

तुझे देखना डूबना हो गया , डूबना -तैरना हो गया
बस रंग से भरा , शेहनाई सा भारी , गहरा है कुआ ,

अनहद नाद जगा दिया , चारों ओर धमाधम हुआ
कौनसा भेस ,कैसा देस , रूप नूर रंग गेहुआ ,

अनकही कोई बात है , हवा है यह या , है यह धुआं
हार या जीत कैसा असमंजस है , कैसा है यह जुआं ॥

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