Jiyra ho gaya ab malang

ना चाहिए किसीका संग
जियरा हो गया अब नूरंग

लढनी  है आज बड़ी यह जंग
गहरी है खाई ऊँचा पर्वत दबंग

बनानी है आज बड़ी यह सुरंग
उडानी है आज दूर सूरज तक पतंग

कैसी है यह तरंग , कैसा है यह रंग
नाच है गली गली अपना अपना ढंग ….

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Peace and war यह नर जो है ज्ञान का आगार यह नर जो है सृष्टि का श्रृंगार यह नर जो धर कर विज्ञान का फूल यह नर जिससे छूटता वज्र सब कुछ भूल यह नर वही जो आनंद मय जब करे उसकी हार यह नर क्यों नहीं पकड़ता हाथ अपने नीली सुरबहार सावधान हो जाये अब यही आर या पार फूल कंटक , भ्रमित विज्ञान ताल- तार या तलवार ॥।

यह नर जो है ज्ञान का आगार
यह नर जो है सृष्टि का श्रृंगार
यह नर जो धर कर विज्ञान का फूल
यह नर जिससे छूटता वज्र सब कुछ भूल
यह नर वही जो आनंद मय जब करे उसकी हार
यह नर क्यों नहीं पकड़ता हाथ अपने नीली सुरबहार
सावधान हो जाये अब यही आर या पार
फूल कंटक , भ्रमित विज्ञान ताल- तार या तलवार ॥।