Poetry

नूर -रौशनी ,तारे ,चाँद, उजाला ,आनंद, परमानद ,ख़ुशी, सूरज ,चांदनी, फूल , खुशबु -और वह  सब कुछ जो  अच्छा है  :-)

कुछ नूर के बारे में :
सोपान नूर(एक छद्म नाम- या कहिये पेन नेम  ) -हिंदी कविता और निबंध जगत के उभरते हुए सितारा , ‘नूर’ है.पेशे से संगीतज्ञ और इंजिनियर -नूर , बहुत छोटी सी उम्र से लिखने लगे है और उनका रुझान साहित्य रचना में बढ़ता जा रहा है.

नूर का जन्म छिन्द्वारा  में हुआ और शिक्षा रायपुर विश्वविद्यालय  से प्राप्त की। प्रथम श्रेणी में एम ए(संगीत -इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय ) करने के बाद डॉ अनीश प्रधान  के निर्देशन औए मार्गदर्शन  में नूर इस्टर्न  दृम्स और तबला सीख रहे है . साहित्य और कला में बचपन से ही नूर का रुझान रहा है .

भाषा: परिमार्जित खड़ीबोली; मुहावरों, लोकोक्तियों, देशज तथा विदेशी भाषाओं के शब्दों का प्रयोग, कविताओं में ताल का प्रभाव नजर आता है ।

शैली :भावात्मक, वर्णनात्मक, शब्द चित्रात्मक,  आलोचनात्मक (हास्य व्यंग्यात्मकता से परहेज )एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रांति की पुकार है, तो दूसरी ओर कोमल श्रृँगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है।

नूर के शब्दों में -नूराना :
जीवन में जो कुछ देखा, सुना और जिया उसे ही शब्दों में समेटने का प्रयास किया है। वैसे सृजन के अविरल प्रवाह में जो विचार, भावनाएँ और कल्पनाएँ आईं उन सभी को अभिव्यक्ति का परिधान दिया। यह सच है कि अनुभूति की मुट्ठी में भावों की रोशनी बंद थी जब खुली तो उन्हीं सिमटी किरणों ने रचनाओं का रूप ग्रहण किया। जीवन में जब जी भाव आये मैंने उनको तब तब वैसे वैसे ही शब्दों में उकेरने की कोशिश की है.जब शुरू किया था लिखना तो अलंकार और छंद करते करते एक हुनर और करतब का एहसास होता था -पर अब उन कद जंजालों को तोड़कर खुद को जो अच्छा लगता है -वह लिखने में ज्यादा सुकून मिलता है -कुछ असल जिन्दगी की तरह. मेरी कविताओं और गुन्जनो में -संगीत का असर है -और संगीत में भी सुरों से ज्यादा बीट्स या रिदम का थोडा ज्यादा, क्यूंकि लिखते लिखते बहुत कम हुआ है की हाथो से ताल ना बज रहा हो.शायद वही ताल और मात्राए बरबस ही कागज़ पर निकल आती है.

नूर की पसंदीदा पंक्तिया और कवी , लेखक :
धर्मवीर भारती, रामधारी सिंह दिनकर,निराला ,माखनलाल चतुर्वेदी, भारतेंदु हरिश्चंद्र , भूषण .

इसलिए, तलवार टूटी, अश्व घायल
कोहरे डूबी दिशाएं
कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धूंध धुमिल
किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी
… क्योंकि सपना है अभी भी!-धर्मवीर भारती

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