Good Times

खुल गए बंधन , खुल गए है अब सब परदे
रहा नहीं कतिपय , यहाँ कुछ दुर्गम वा अज्ञेय
चिर गए पाश , महालिन हुए सब निबंध प्रमेय
बस बचा है शान्ति , का तर महालय ध्येय
वासना , अग्नि , पोथी है अब प्राचीर प्राचीन
फिर तभी कभी क्यों नर को चाहिए , नित छिन्न भिन्न दुर्जेय ।

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Lepakshi and Los Angels

चांदण्या  च्या वना मधे , एक नीली  परी
नूर उन वार्या  मधे , एक गुलाब गाला  वरी ॥

सैल पूल प्रीती शिखर , प्राण नाव सरोवरी ।
स्वप्न परीपूर्ण नूर , रंजक तू मनोहरी ॥

चिरन्तन परिपूर्ण खली , स्वछन्द आनन्द घरी ।
तुझा हां हास मनवास, अमृत की मधुकरी ॥  

लेपाक्शी संथ  गति , स्वर रंग घरोघरी ।
चित्र संचित पल्लव  झूम , आज नूर बरोबरी ॥